March 26, 2023

उत्तराखंड में दूधवाले कि बेटी ने किया कमाल, मुश्किल वक्त से लड़कर सवारी अपने परिवार की स्तिथि

उत्तराखंड के छात्र पूरी दुनिया में सिर उठा रहे हैं। आज हम आपको देवभूमि की एक ऐसी तस्वीर की कहानी बताने जा रहे हैं जिसे देखकर आप दंग रह जाएंगे।

पिता बेचते थे दूध बेटी को बनाया IAS ऑफिसर

यह राज्य की एक बेटी की कहानी है जिसने राज्य को गौरवान्वित किया है। हम बात कर रहे हैं बागेश्वर की युवा जिलाधिकारी अनुराधा पाल की जिन्होंने विपरीत दिशा से हार नहीं मानी और न केवल आईएएस अधिकारी बनने का मुकाम हासिल किया बल्कि वर्तमान समय में एक जिले की जिलाधिकारी की जिम्मेदारी भी निभा रही हैं।

आईएएस अनुराधा ने सीमांत पिथौरागढ़ जिले की मुख्य विकास अधिकारी की जिम्मेदारी भी कुशलता से निभाई। लेकिन इस पद पर आने से पहले उन्होंने अपने पूरे जीवन और करियर में काफी संघर्ष भी किया, लेकिन विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और आईएएस बनने के अपने सपने को पूरा किया।

आपको बता दें कि उत्तराखंड कैडर की रहने वाली अनुराधा पाल उत्तराखंड कैडर की 2016 बैच की आईएएस अधिकारी हैं, उन्होंने कभी भी अपने सपनों का बोझ गरीब माता-पिता पर नहीं आने दिया. गांव के बेहद साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली अनुराधा के पिता दूध बेचकर परिवार का भरण पोषण करते थे।

अनुराधा ने जवाहर नवोदय विद्यालय, हरिद्वार में अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की, जिसके बाद उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार में इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की।

अनुराधा महिंद्रा टेक में शामिल हो गईं, जिसके बाद उन्होंने लेक्चरर के रूप में कॉलेज ऑफ़ टेक्नोलॉजी रुड़की में प्रवेश लिया, जहाँ उन्होंने तीन साल तक सेवा भी की।

आपको बता दें कि अनुराधा ने नौकरी छोड़कर सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने का फैसला किया, इसके लिए वह दिल्ली आ गईं। उसने ट्यूशन देकर अपने लिए पैसे भी जुटाए और उसकी कोचिंग क्लास की फीस भी भरी।

साल 2012 में उन्होंने पहली बार यूपीएससी की परीक्षा दी, जिसमें उन्हें सफलता भी मिली और 451वीं रैंक हासिल की। जिससे उन्हें आईआरएस ऑफिसर बनने का मौका मिला। करीब दो साल तक इस पद पर काम करने के साथ ही उन्होंने आईएएस बनने की तैयारी भी जारी रखी।

आईएएस बनने के लिए उन्होंने 2015 में दोबारा यूपीएससी की परीक्षा दी और इस बार उनकी ऑल इंडिया रैंक 62 थी और आईएएस बनाने में सफल रहीं।

बार-बार असफल होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी, अंततः अपनी मेहनत के दम पर सिविल सेवा परीक्षा 2015 में हिंदी माध्यम की टॉपर बनीं।

आपको बता दें कि अनुराधा अपनी पूरी सफलता का श्रेय अपनी मां को देती हैं। अनुराधा के मुताबिक, वह आज इस मुकाम तक अपनी मां की वजह से ही पहुंच पाई हैं।

Vaibhav Patwal

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