Breaking News
Home / देहरादून न्यूज़ / कैसा था देहरादून जब रेसकोर्स पर दौड़ते घोड़ों को मसूरी से देखते थे अंग्रेज, तस्वीरो में देखे अनोखा दून

कैसा था देहरादून जब रेसकोर्स पर दौड़ते घोड़ों को मसूरी से देखते थे अंग्रेज, तस्वीरो में देखे अनोखा दून

उत्तराखंड में ऐसे कई शहर हैं जिनका इतिहास तो है लेकिन इसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं, उनमें से एक है देहरादून, जी हां उत्तराखंड की राजधानी का लंबा इतिहास है, जिससे यहां के लोग भी अनजान हैं। सर्वप्रथम इस शहर का नाम शिक्षा के क्षेत्र में बहुत सम्मान के साथ लिया जाता है, 20वीं सदी के मध्य में यहां कई शिक्षा संस्थान हैं जो यहां पढ़ने आने वाले बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करते हैं।

1900 में दौड़ी थी यहां पहली बार ट्रेन

आज हम जिस देहरादून शहर को देखते हैं, वह ब्रिटिश शासन के दौरान बहुत अलग हुआ करता था। आज हम आपको देहरादून शहर से जुड़े ऐसे ही राज बताने जा रहे हैं, जो आपको हैरान कर देंगे। सबसे पहले बात करते हैं शहर के नाम की। देहरादून दो शब्दों देहरादून + दून से मिलकर बना है।

बताया जाता है कि वर्ष 1667 में जहां गुरु राम राय यहां आए थे, उन्होंने यहां परमार वंश के राजा फतेहपति शाह के शासन में अपना डेरा बनाया था। वहीं से इस नाम की उत्पत्ति डेरा-दून हुई।

इस छावनी के आसपास देहरादून शहर बसने लगा। इस प्रकार दून शब्द को डेरा शब्द से जोड़ने के कारण इसे देहरादून के नाम से जाना जाने लगा। बुजुर्ग लोगों का कहना है कि पुराने जमाने में यहां बर्फबारी हुआ करती थी, यह सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है लेकिन यह सच है।

देहरादून में पहली बर्फबारी 11 जनवरी 1945 को देहरादून में हुई थी। वर्ष 1943 में देहरादून शहर के सिनेमा हॉल और सिनेमा हॉल में बार हुआ करते थे। भारत छोड़ो आंदोलन से भी इस शहर का गहरा नाता है।

1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान सैकड़ों सत्याग्रहियों को धमावाला स्थित कोतवाली में बंदी बनाकर रखा गया था। शहर का वह क्षेत्र जिसे आज हम रेसकोर्स के नाम से जानते हैं, एक समय ऐसा स्थान था जहां साल 1885 में घोड़े दौड़ाए जाते थे।

यूँ ही नहीं अंग्रेज कायल हो गए थे देहरादून के बहुत खास थी यहां की हवा

द ईस्टर्न फॉरेस्ट रेंजर कॉलेज, एशिया का पहला फॉरेस्ट्री कॉलेज, देहरादून में है। अब वन अनुसंधान संस्थान के रूप में जाना जाता है। इसके मध्य में स्थित देहरादून की प्रसिद्ध मीनार, जिसे ‘घंटाघर’ के नाम से जाना जाता है, के बारे में बताया जाता है कि यह घड़ी जर्मनी से मंगवाई गई थी।

यहां का उच्चतम तापमान 4 जून 1902 को दर्ज किया गया था, जो 43.9 डिग्री सेल्सियस था। जबकि सबसे कम तापमान 1 फरवरी 1905 को -1.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।

आजादी से पहले यह शहर मेरठ, सहारनपुर, कुमाऊं कमिश्नरी का हिस्सा था और वर्तमान में यह गढ़वाल का हिस्सा है। आधुनिक देहरादून का निर्माण वर्ष 1817 में हुआ था। यह उत्तराखंड का पहला नगर निगम भी है।

न केवल देहरादून बल्कि अन्य जिलों से भी जुड़े कई रोचक तथ्य हैं, जो हम आपको प्रदान करेंगे।

About Vaibhav Patwal

Haldwani news