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जिसके कंधो पर जीवित है उत्तराखंड रोडवेज उसके खर्चे नहीं उठा पा रहा विभाग, राज्य में यहाँ बंद हुई बस सेवा

सिर्फ आम आदमी ही नहीं इस महंगाई ने अमीर वर्ग और यहां तक ​​कि खुद सरकार को भी परेशान किया है, लेकिन कारण जो भी हो, काम चलते रहना चाहिए।

ड्राइवर और कन्डक्टर का रहने और खाना पड़ रहा भारी

इसी से जुड़ा एक मामला सामने आ रहा है कि चालक-कंडक्टर के भोजन का भुगतान नहीं कर पाने के कारण यात्री बस सेवा को रोक दिया जाए। उत्तराखंड रोडवेज ने यही किया है। एक खबर के मुताबिक रोडवेज ने खिर्सू के लिए अपनी बस सेवा बंद कर दी।

कारण पूछने पर वे विचित्र कारण बता रहे हैं। बताया जा रहा है कि रोडवेज चालक व परिचालक को सस्ते भोजन व रहने की सुविधा नहीं मिल रही थी. रोडवेज ने अपना खर्च बचाने के लिए देहरादून-खिरसू बस सेवा पर ब्रेक लगा दिया। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है।

रोडवेज ने अपना खर्चा बचाने और खुद को घाटे में जाने से बचाने के लिए देहरादून-खिरसू बस सेवा पर ब्रेक लगा दिया. ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, अधिकारियों की अनुशंसा पर रोडवेज नई बस सेवा शुरू कर वाहवाही बटोरी।

परंतु, कुछ दिन बाद ही बस सेवा बंद कर दी जाती है। इस बार देहरादून-खिरसू बस सेवा बंद कर दी गई। इससे यात्रियों को परेशानी हो रही है। अक्टूबर के पहले सप्ताह में देहरादून से खिरसू के लिए बस सेवा शुरू की गई थी, लेकिन कुछ दिनों बाद 17 अक्टूबर को बस सेवा बंद कर दी गई।

कारण पूछे जाने पर रोडवेज प्रबंधन ने बताया कि चालक-परिचालक को प्रति व्यक्ति 140 रुपये रात्रि भत्ता मिलता है, जो रहने के लिए मिलता है, लेकिन खिरसू में एक व्यक्ति के खाने और ठहरने का खर्च 400 रुपये से लेकर 500 रुपये तक है।

चालक-परिचालक बिल का भुगतान नहीं कर पा रहे हैं, इसलिए बस सेवा को बंद करने की जरूरत है। हिल डिपो के सहायक महाप्रबंधक गजेंद्र कठैत ने बताया कि खिर्सू में चालक-कंडक्टर के आवास की व्यवस्था की जाती है तो सेवा शुरू की जाएगी।

यहां चालक-परिचालकों को सस्ता भोजन और रहने की सुविधा नहीं मिल पा रही थी, जिसके कारण बस सेवा को बंद करने का निर्णय लेना पड़ा।

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