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उत्तराखंड में घर बनाना तो दूर सपना देखना भी हुआ महंगा, बढ़ने जा रहे है जमीनों के दाम

जैसे-जैसे महानगरों में दिन-ब-दिन भीड़ होती जा रही है, लोग उत्तराखंड के पहाड़ों के पास जमीन और घर बनाने की योजना बना रहे हैं। लेकिन उत्तराखंड में जमीन खरीदना भी महंगा हो रहा है। पिछले दो साल से प्रदेश में जमीन के सर्किल रेट नहीं बढ़े हैं, लेकिन इस बार राज्य सरकार की तैयारी पूरी है।

2 साल से रूकी सरकार सर्किल रेट पर लगाएगी धक्का

जिलों में सर्किल रेट बढ़ाने के लिए सरकार ने सभी जिलाधिकारियों से प्रस्ताव मांगा है. सब कुछ प्लानिंग के मुताबिक रहा तो जनवरी में सर्किल रेट बढ़ा दिए जाएंगे। जिलों से प्रस्ताव मिलने के बाद अब इस मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।

वित्त विभाग के सचिव दिलीप जावलकर ने इस बात की पुष्टि की है कि सर्किल रेट के लिहाज से प्रस्ताव बनाया गया है, हालांकि सर्किल रेट कितना बढ़ाया जाएगा, इस बारे में अभी कुछ तय नहीं हुआ है. देहरादून प्रशासन ने भी तैयारी शुरू कर दी है, डीएम सोनिका ने कहा कि सरकार को सर्किल रेट बढ़ाने को लेकर प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया है।

प्रदेश में सर्किल रेट हर साल औसतन 10 फीसदी की दर से बढ़ाए जाते हैं। लेकिन कभी-कभी वित्त विभाग सर्किल रेट की दरों में एकरूपता लाने के लिए कुछ विशेष क्षेत्रों के सर्किल रेट को निर्धारित सीमा से अधिक बढ़ा देता है। प्रदेश में सबसे ज्यादा सर्किल रेट कहां है। आपको लगता होगा कि देहरादून में जमीन सबसे महंगी है, लेकिन ऐसा नहीं है।

वर्तमान में हरिद्वार में हरकी पैड़ी से कोतवाली नगर तिराहा के बीच भूमि का सर्किल रेट प्रदेश में सबसे अधिक है। यहां की जमीन का सर्किल रेट 57 हजार प्रति वर्ग मीटर चल रहा है। दूसरे नंबर पर देहरादून का राजपुर रोड है। यहां घंटाघर से आरटीओ तक सर्किल रेट प्रति वर्ग मीटर 50 हजार रुपये है।

हालांकि जमीन की वास्तविक दरें इससे कई गुना ज्यादा हैं। बता दें कि राज्य में जमीन के सर्किल रेट पिछले दो साल से नहीं बढ़े हैं. कोविड के कारण 2021 में सर्किल रेट नहीं बढ़े, जबकि 2022 में राज्य विधानसभा चुनाव को देखते हुए सर्किल रेट नहीं बढ़ाए गए। लेकिन अब एक बार फिर सर्किल रेट बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी गई है. इस संबंध में वित्त विभाग की बैठक में निर्णय लिया गया है।

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