February 7, 2023

विक्रम वेधा: क्या आप जानते हैं फिल्म से जुड़ी ये बातें, जानिए क्यों हमेशा दो गोलियां दागता है विक्रम का किरदार |

ऋतिक रोशन और सैफ अली खान स्टारर फिल्म ‘विक्रम वेधा’ 30 सितंबर को रिलीज हो रही है। इस फिल्म में जहां ऋतिक डॉन वेधा के रोल में होंगे वहीं सैफ पुलिस ऑफिस विक्रम के रोल में नजर आएंगे। यह 2017 में रिलीज हुई तमिल फिल्म विक्रम वेधा की रीमेक है जिसे डायरेक्टर कपल पुष्कर-गायत्री ने ही डायरेक्ट किया था। विजय सेतुपति और आर माधवन स्टारर यह फिल्म साउथ में बहुत बड़ी हिट साबित हुई थी। आज जब इस फिल्म का हिंदी रीमेक रिलीज होने जा रहा है तो चलिए इसे देखने से पहले ओरिजिनल फिल्म से जुड़ी कुछ मजेदार बातें जान लेते हैं। ओरिजिनल फिल्म में लीड रोल प्ले करने वाले एक्टर्स विजय सेतुपति और आर माधवन पहली बार एक दूसरे से इस फिल्म के सेट पर ही मिले थे। मेकर्स ने भी दोनों को पहले मिलने नहीं दिया क्योंकि वह चाहते थे कि दोनों की पहली मुलाकात वाला सीन जबरदस्त बने। यह एक भारी-भरकम एक्शन फिल्म है। इसके सेट पर 3000 से ज्यादा गोलियों का इस्तेमाल किया गया था। फिल्म में पुलिस का किरदार निभाने वाले कलाकारों ने जो बंदूकें इस्तेमाल की हैं वह तमिलनाडु पुलिस फोर्स की ऑथेंटिक पिस्टल हैं। माधवन के किरदार विक्रम की एक खास बात यह है कि वह जब भी किसी गुंडे को गोली मारता है तो दो गोलियां फायर करता है। यह उसका सिग्नेचर स्टाइल है। फिल्म में इसी तरीके का सिग्नेचर स्टाइल वेधा का भी है। डायरेक्टर पुष्कर और गायत्री ने इस फिल्म के लिए सबसे पहले राजा विक्रमादित्य और बेताल वाला प्लॉट तैयार किया था। इसके बाद उन्होंने इसके इर्द-गिर्द पॉलिटिक्स, बिजनेस, जर्नलिज्म और बाकी सारी चीजों को जोड़कर एक जबरदस्त कॉप-गैंगस्टर वर्ल्ड तैयार किया। फिर के शुरुआती सीन में जब किरदारों को इंट्रोड्यूस किया जाता है तो विक्रम सफेद शर्ट पहने नजर आता है, जो की अच्छाई का प्रतीक मानी जाती है। वहीं वेधा काली शर्ट पहने नजर आता है, जो बुराई का प्रतीक मानी जाती है। हालांकि जब फिल्म खत्म होती है तो दोनों ही किरदार ग्रे शर्ट पहने नजर आते हैं। जिसका मतलब यह है कि ना तो वो भगवान हैं और ना ही शैतान। फिल्म यही मैसेज देना चाहती है कि हम सभी में अच्छाई और बुराई दोनों ही हैं। फिल्म में वेधा का किरदार चार अलग-अलग लुक में नजर आता है। 20 साल की उम्र के युवा से लेकर, 30 साल की उम्र के गैंगस्टर तक और फिर 40 साल के गैंगलॉर्ड से लेकर बाहुबली तक।

Vikram Vedha Review: ऋतिक चमके पर फीके रहे सैफ, जानिए फिर कौन है फिल्म का असली हीरो

अंधाधुन चलती गोलियां, स्वैग में वॉक करते सैफ अली खान और फिर तलवार लेकर छत से कूदते ऋतिक रोशन। अगर फिल्म के ट्रेलर में यह सब देखकर आप ने यह अनुमान लगाया कि फिल्म में धड़ाधड़ एक्शन सीन नजर आएंगे, तो आप मयूस हो जाएंगे। यहां एक्शन तो है पर थोड़े अलग ही अंदाज में। पर हां यहां आपको देखने और सुनने को मिलेगी एक जबरदस्त कहानी और एक नए अंदाज में नजर आएंगे बॉलीवुड के ग्रीक गॉड यानी कि ऋतिक रोशन। तो चलिए यह जानने से पहले की फिल्म कैसी है? फिल्म शुरू होती है एक एनिमेटेड स्टोरी से जिसमें राजा विक्रमादित्य और बेताल की कहानी सुनाई जाती है। इस कहानी को आवाज दी है एक्टर विजय राज ने। इस छोटी सी कहानी के जरिए निर्देशक बताना चाहता है कि अगले ढ़ाई घंटे तक आप क्या देखने जा रहे हैं। फिल्म शुरू होती है एक ऐसे पुलिस ऑफिसर विक्रम से जो क्रिमिनल्स को पकड़ता है और उनका एनकाउंटर करता है। उसे लगता है कि वो दुनिया से बुरे लोगों को कम करके सही काम कर रहा है। विक्रम दरियादिल भी है और जिन क्रिमिनल्स का एनकाउंटर करता है उनके बच्चों का ख्याल भी रखता है। बहरहाल विक्रम और उसकी टीम का गठन वेधा नाम के कुख्यात अपराधी को पकड़ने के लिए किया गया है जिसके ऊपर 16 मर्डर केस दर्ज हैं। इससे पहले कि विक्रम वेधा को पकड़े, वेधा खुद आकर सरेंडर कर देता है और फिर शुरू होता है चूहे बिल्ली का खेल। इस खेल में एक एक करके फिल्म के कई अन्य किरदार शामिल होते चले जाते हैं। वहीं दूसरी तरफ विक्रम वेधा को तीन बार पकड़ता है और हर बार वेधा उसके कहानी सुनाकर, उसे उलझाकर भाग जाता है। इससे आगे की कहानी समझने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी। म्यूजिक के नाम पर फिल्म में दो गाने हैं। एक ‘अल्कोहलिया’ अच्छा गाना है और दूसरा गाना ‘बंदे’ फिल्म की पूरी थीम को सूट करता है। बैकग्राउंड म्यूजिक जबरदस्त है और कई दृश्यों को मजेदार बनाने में मदद भी करता है।

एक्टिंग

एक्टिंग की बात करें तो पूरी फिल्म में ऋतिक रोशन छाए हुए हैं। वे जब-जब स्क्रीन पर आते हैं दर्शकों को मजा आता है। कानपुर और लखनऊ की भाषा पकड़ने से लेकर वेधा के किरदार के अलग-अलग रूप दिखाने तक ऋतिक का काम बेहतरीन है। सैफ अली खान से भी कुछ इसी तरीके के काम की उम्मीद की गई थी पर उनके काम में कुछ नयापन नहीं है। उनका काम बुरा नहीं है पर जिस तरह ऋतिक ने अपने किरदार को लेयर्स के साथ खेला है सैफ वैसा नहीं कर पाए। वे कई जगहों पर एक से ही एक्सप्रेशन में नजर आते हैं। ओवरऑल ऋतिक और सैफ दोनों को एक ही फ्रेम में साथ देखकर मजा तो आता है। दोनों के अलावा राधिका आप्टे हमेशा की तरह अच्छा काम करती नजर आई हैं। रोहित सराफ और योगिता बिहानी के पास करने के लिए जितना काम था उतना उन्होंने अच्छे से किया है। बबलू के किरदार में शारिब हाशमी कहीं-कहीं ओवर एक्टिंग करते नजर आए हैं। बाकी कलाकारों में कोई भी बड़ा नाम नहीं है पर सभी ने अपना किरदार ठीक-ठीक निभाया है। सीनियर पुलिस ऑफिसर के रोल में नजर आए टीवी एक्टर और मशहूर वॉइस ओवर आर्टिस्ट शक्ति सिंह दो सीन में भी अपना कमाल का अभिनय देकर गए हैं। बतौर निर्देशक पुष्कर और गायत्री ने जो काम ओरिजिनल ‘विक्रम वेधा’ में किया था उसे वह इस रीमेक में पूरी तरह से रिपीट नहीं कर पाए। एक ही कहानी को दोबारा पेश करने के लिए जरूरी नहीं कि सभी सीन भी एक जैसे ही हों। कहीं न कहीं विक्रम के साथी कलाकारों की कास्टिंग में भी एक-आध जाना पहचाना चेहरा होना चाहिए था तो फिल्म के हर सीन में ऋतिक की कमी नहीं खलती। फिल्म में पुष्कर-गायत्री ने लखनऊ और कानपुर को बड़े ही अच्छे तरीके से पेश किया है। तंग गलियों में शूट किए गए सीन्स अच्छे बन पड़े हैं। हालांकि, मेकर्स एक्शन के मामले में थोड़ा सा पिछड़ गए पर कुल मिलाकर फिल्म की असली हीरो वही स्टोरी है जिसे पुष्कर और गायत्री ने मिलकर लिखा है। तो यहां दोनों ने डायरेक्शन से ना सही स्टोरी से जरूर फिल्म को संभाल लिया है।

 

 

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