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उत्तराखंड में पानी की बर्बादी रोकने के लिए जल संस्थान ने उठाये कदम, अब मीटर की रीडिंग से देना होगा बिल

उत्तराखंड सरकार में पानी के उपयोग और बर्बादी को कम करने के लिए कुछ ऐसा करने की कोशिश की जा रही है जिसे पहले शुरू किया जाना चाहिए। जल संस्थान हरिद्वार में पानी की बर्बादी रोकने के लिए बड़ा कदम उठाने जा रहा है। इधर, अब पानी का बिल मीटर रीडिंग से लिया जाएगा।

अगले महीने से हरिद्वार में मीटर से आएगा पानी का बिल

मीटर लगने के बाद लोगों को रीडिंग के हिसाब से बिल देना होगा। खर्च किए गए पानी की मात्रा मीटर में दर्ज की जाएगी। शहर के लोग रोजाना सैकड़ों लीटर पेयजल बर्बाद कर रहे हैं। मीटर लगे तो लोग जरूरत के हिसाब से पानी का इस्तेमाल करेंगे। इससे पानी की बर्बादी रुकेगी।

इसके लिए पिछले एक माह से नई व्यवस्था लागू करने की कार्ययोजना भी तैयार की जा रही है। मंगलवार को पानी कम होने की शिकायत मिलने पर जल संस्थान हरिद्वार के अधिकारियों ने बिलकेश्वर कॉलोनी, ब्रह्मपुरी, हिल बाइपास, बसंत गली, कुंज गली, कैलाश गली, भूपतवाला आदि क्षेत्रों का निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान देखा जा रहा है कि लोग मौके पर ही भारी मात्रा में पेयजल की बर्बादी करते दिखे. लोग पानी से कार धो रहे थे, पीने के पानी से सड़कें धो रहे थे। कई जगह टैंक ओवरफ्लो हो रहे थे।

विभागीय अधिकारियों ने बताया कि पानी की बर्बादी रोकने के लिए अब जल संस्थान पूरे शहर में मीटर लगाने की तैयारी कर रहा है।

मीटर लगने के बाद लोगों को रीडिंग के हिसाब से बिल देना होगा। खर्च किए गए पानी की मात्रा मीटर में दर्ज की जाएगी। रीडिंग के आधार पर बिल वसूला जाएगा। मीटर लगने के बाद बिल की राशि भी बढ़ जाएगी। फिलहाल चार महीने का औसतन 400 रुपये का बिल लोगों को भेजा जाता है. मीटर लगने के बाद यह बिल बढ़ेगा। जल संस्थान के इस कदम से पानी की बर्बादी रोकने में मदद मिलेगी।

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