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रंगबाज के विनीत कुमार से फैंस हुए नाराज, जानिए क्या है माजरा

विनीत कुमार सिंह एक ऐसे अभिनेता हैं जिन्होने अपनी दमदार एक्टिंग के दम पर इंडस्ट्री में जगह बनाई है। अभी पिछले दिनों हो विनीत की फिल्म सिया रिलीज़ हुई, यह फिल्म एक ऐसे मुद्दे पर बनाई गई है जिसके बारे में जल्दी कोई बात नहीं करना चाहता। उनकी इस फिल्म को क्रिटिक्स ने भी खूब सराहा। मनीष मुंद्रा द्वारा निर्देशित इस फिल्म में विनीत कुमार सिंह के साथ पूजा पांडेय नज़र आईं। फिल्म रिलीज के वक्त विनीत ने फिल्म की रिलीज डेट अपने सोशल मीडिया पर शेयर की और अपने फैन्स से अपील की कि वे सिया फिल्म को जरूर देखें। माउथ पब्लिसिटी के साथ यह फिल्म गांव खेड़े तक पहुंच रही है , और गोरखपुर और प्रतापगढ़ जैसे छोटे छोटे शहरों में इस फिल्म के स्क्रीनिंग नही की गई है। इस बात से अपसेट होकर उनके कई फैंस ने इस बात पर नाराजगी बयां की। इस बात से नाराज़ विनीत ने अपने फैंस का समर्थन करते हुए अपने सोशल मीडिया पर एक विडियो शेयर किया। हाल ही में विनीत कुमार सिंह ने अपने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया है जो इंटरनेट पर धूम मचा रहा है। इस पर अभिनेता ने कहा, “यह वीडियो बनाने से पहले मैं सोच रहा था कि मुझे यह करना चाहिए या नहीं। लेकिन मेरा मानना है कि अपने दिल की बात कहना महत्वपूर्ण है। आप सभी ने मुझे मुक्केबाज़ , गैंग्स ऑफ वासेपुर, अग्ली, सांड की आंख, गुंजन सक्सेना और मेरी हाल ही में रिलीज हुई सीरीज रंगबाज में देखा होगा और आज मेरी फिल्म सिया रिलीज हुई और मैं चिंतित हूं क्योंकि मुझे गोरखपुर, प्रतापगढ़ (जहां फिल्म शूट किया गया है), बनारस और कई अन्य स्थानों पर मुझे सूचित किया कि फिल्म एक स्क्रीन में भी नहीं है। मैं एक अभिनेता हूँ। मैं स्क्रिप्ट को समझता हूं, मैं किरदारों को समझता हूं, लेकिन मुझे डिस्ट्रीब्यूशन की समझ नहीं है, लेकिन मैं यह जानता हूं कि अगर आप, दर्शक, जाकर फिल्म देखेंगे, तो यह बढ़ेगा। फिल्म को आप ही आगे ले जा सकते हैं, यह दर्शकों के हाथ में है। जब मैंने फिल्म साइन की तो मुझे लगा कि यह हमारे समय के लिए एक महत्वपूर्ण और जरूरी फिल्म है। अब मैं इसे आप पर छोड़ता हूं।”

किस बात से इतने डरे हुए हैं ‘मुक्केबाज’ विनीत कुमार, बोले- प्लीज़! आप जाओ

विनीत कुमार सिंह एक ऐसे अभिनेता हैं जिन्होने अपनी दमदार एक्टिंग के दम पर इंडस्ट्री में जगह बनाई है. अभी पिछले दिनों हो विनीत की फिल्म सिया रिलीज़ हुई, यह फिल्म एक ऐसे मुद्दे पर बनाई गई है जिसके बारे में जल्दी कोई बात नहीं करना चाहता. उनकी इस फिल्म को क्रिटिक्स ने भी खूब सराहा. मनीष मुंद्रा द्वारा निर्देशित इस फिल्म में विनीत कुमार सिंह के साथ पूजा पांडेय नज़र आईं. फिल्म रिलीज के वक्त विनीत ने फिल्म की रिलीज डेट अपने सोशल मीडिया पर शेयर की और अपने फैन्स से अपील की कि वे सिया फिल्म को जरूर देखें । माउथ पब्लिसिटी के साथ यह फिल्म गांव खेड़े तक पहुंच रही है , और गोरखपुर और प्रतापगढ़ जैसे  छोटे छोटे शहरों में इस फिल्म के स्क्रीनिंग नही की गई है. इस बात से अपसेट होकर उनके कई फैंस ने इस बात पर नाराजगी बयां की. इस बात से नाराज़ विनीत ने अपने फैंस का समर्थन करते हुए अपने सोशल मीडिया पर एक विडियो शेयर किया । हाल ही में विनीत कुमार सिंह ने अपने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया है जो इंटरनेट पर धूम मचा रहा है. इस पर अभिनेता ने कहा, “यह वीडियो बनाने से पहले मैं सोच रहा था कि मुझे यह करना चाहिए या नहीं. लेकिन मेरा मानना है कि अपने दिल की बात कहना महत्वपूर्ण है. आप सभी ने मुझे मुक्केबाज़ , गैंग्स ऑफ वासेपुर, अग्ली, सांड की आंख, गुंजन सक्सेना और मेरी हाल ही में रिलीज हुई सीरीज रंगबाज में देखा होगा और आज मेरी फिल्म सिया रिलीज हुई और मैं चिंतित हूं क्योंकि मुझे गोरखपुर, प्रतापगढ़ (जहां फिल्म शूट किया गया है), बनारस और कई अन्य स्थानों पर मुझे सूचित किया कि फिल्म एक स्क्रीन में भी नहीं है.

कैसी है शहाबुद्दीन पर बनी वेबसिरीज़ ” रंगबाज़ ” ?

रंगबाज़… इस सीरीज़ का “हीरो” जो मरते दम तक विलेन रहा, उसे जब सिनेमा में फिल्माया गया तो Vineet Kumar Singh को चुना गया,जो अपने रॉल के साथ ईमानदार नज़र आये हैं। लेकिन सिर्फ ईमानदार नज़र आना काफी है? क्या सिर्फ ऐक्टिंग के बल पर एक विशालकाय शख्सियत को पर्दे पर उतारा जा सकता है? ये बहुत बड़ा सवाल है। विनीत कुमार ने खुद को हमेशा साबित किया है,गैंग्स ऑफ वासेपुर में बाहुबली सरदार खान का बड़ा और दमदार बेटा बन कर और “मुक्केबाज़” में नेशनल लेवल का मेहनती बॉक्सर बन कर,असल मे तो हिंदी पट्टी का ये कलाकार बहुत शानदार है लेकिन “सीवान का शेर” नाम से मशहूर शख्स का रॉल आप सिर्फ एक्टिंग के बल पर कम्पलीट नहीं कर सकते हैं। शाहबुद्दीन बिहार की राजनीति का वो अध्याय हैं,जिसने राजनीति में जैसे को तैसा जवाब दिया,जिसने एक ही जगह स्थापित रह कर विधायक से लेकर सासंद तक का सफर पूरा किया,सीवान में उस शख्स को “रॉबिनहुड” कहा गया,इस सब के साथ उसकी आँखों से उसके दुश्मन “खौफ’ खाते थे,वो जेल में हो या बाहर उस शख्स का सिक्का हमेशा चलता था,ये राजनीति में उसका वजूद था। विनीत कुमार यहां ही कमज़ोर रह गए,वो पुलिस अफसर को थप्पड़ मारने वाले सीन तक में आंखों में तेज और और आवाज़ में रौब नहीं ला पाये, वहां निराशा हाथ लगी,क्योंकि जो नेता जब इस स्थान तक गया है तो वो यू ही तो नहीं गया है? वो बिहार की सबसे बड़ी पार्टी का दूसरे नम्बर का नेता है आखिर उस दृश्य मे गरज तो दिखनी ही चाहिए थी। यहां कमी रह गयी,और ये कमियां न सिर्फ इस कहानी को कमज़ोर बनाती है,बल्कि ये बताती भी है कि आज भी हमारे यहां बायोपिक असली कहानियों से हटकर उस कहानी पर बनती है जो कहानियां अफवाहो के नाम पर चला करती हैं,वरना तेज़ाब कांड का सीन तो कोर्ट में विचाराधीन मुकदमे ही से अलग है।

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