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उत्तराखंड के शिक्षण संस्थान में बड़ी गलती, सरकारी स्कूल में भारत के नक़्शे से राजधानी ही गायब

एक समय था जब उत्तराखंड शिक्षा के लिए जाना जाता था। यहां कई स्कूल हैं जो शिक्षा की अच्छी गुणवत्ता प्रदान करते हैं। देश के कोने-कोने से लोग यहां शिक्षा प्राप्त करने के लिए आते हैं। यहां के सरकारी स्कूल भी अच्छे हैं लेकिन समय के साथ यहां चीजें भ्रष्ट हो गईं। अब हालत यह है कि उत्तराखंड में सरकारी स्कूल भगवान के भरोसे चल रहे हैं।

सरकारी स्कूल में भारत के नक़्शे से राजधानी ही गायब

लापरवाही की बात मत पूछिए, कभी-कभी मास्टर शराब पीकर स्कूल आ जाते हैं, तो एक ऐसा स्कूल है, जहां भारत के नक्शे से बच्चों को पढ़ाया जा रहा था, जिसमें राजधानी दिल्ली नजर नहीं आती। अब जानिए मामला कैसे पकड़ा गया। दरअसल उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम देहरादून के आपदा प्रभावित मालदेवता इलाके का दौरा कर रही थी।

मामला तब सामने आया जब उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम देहरादून के आपदा प्रभावित मालदेवता इलाके का दौरा कर रही थी। इस दौरान शिव जूनियर हाई स्कूल स्थित आपदा राहत शिविर में पहुंची टीम ने आपदा प्रभावितों को राशन व राहत सामग्री वितरित की।

साथ ही शिविर में रह रहे बच्चों की शिक्षा व खेलकूद की जानकारी व जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान आयोग के सदस्य दीपक गुलाटी का ध्यान स्कूल की दीवार पर लगे भारत के गलत नक्शे की ओर गया।

दृश्य ने करवट ली फिल्म की तरह, जब वह नक्शे के करीब गया तो उसने एक बड़ी गलती देखी उसने कहा कि स्कूल में बने भारत के नक्शे ने न केवल देश की राजधानी दिल्ली को दिखाया है, जो एक तरह से इसके अंतर्गत आता है देशद्रोह की श्रेणी। राष्ट्रवाद सबसे ऊपर है। इसमें किसी भी तरह की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जा सकती है। वहीं प्राचार्य ने बताया कि यह नक्शा करीब 2 से 4 दिन पहले ही बनाया गया है। दिल्ली को नक्शे में नहीं दिखाना मानवीय भूल है।

आयोग के सदस्य दीपक गुलाटी ने नक्शा बनाने वाले चित्रकार से बात की तो उन्होंने कहा कि यह नक्शा करीब 20 दिन पहले बनाया गया है। आयोग के सदस्य दीपक गुलाटी ने गलत नक्शे पर आपत्ति जताई है।

 

उन्होंने कहा कि शिक्षा के मंदिर में देश के नक्शे को गलत तरीके से दिखाना महज लापरवाही या गलती नहीं, बल्कि देश से जुड़ा एक गंभीर मामला है। उन्होंने स्कूल के प्रिंसिपल से नाराजगी जताते हुए इसे तुरंत ठीक करने को कहा है।

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