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विदेशों की तरह अब उत्तराखंड में भी दोपहिया हुई इंटरसेप्टर, अब सड़क नियम तोड़ने वालों की खैर नहीं

यातायात नियम लोगों की सुरक्षा के लिए बनाए गए हैं, लेकिन लोग आज तक उनका पालन करना नहीं सीख पाए। नशे की लत और तेज रफ्तार जैसे कई मामले सड़क हादसों का कारण बन रहे हैं। इन्हें रोकने के लिए अब उत्तराखंड के पुलिस विभाग ने इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। इसकी मदद से पुलिस तेज रफ्तार और शराब पीकर वाहन चलाने वालों पर कड़ी नजर रखेगी. स्पीड पर लगाम लगाने के लिए बाइक को मॉडिफाई कर स्मार्ट बनाया जाएगा. अभियान के लिए मोटरसाइकिलें खरीदी जा रही हैं। इंटरसेप्टर वाली बाइक को खास तरीके से बनाया जा रहा है।

सबसे पहले यह अभियान चार मैदानी जिलों देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल से शुरू होगा। यहां आपको दोपहिया इंटरसेप्टर के बारे में भी पता होना चाहिए। पुलिस द्वारा तैयार किए गए मॉडल के अनुसार मोटरसाइकिलों को खरीदा जाएगा और उन्हें दोपहिया इंटरसेप्टर के रूप में रीकास्ट किया जाएगा। इस बाइक के फ्रंट में हाई स्पीड डिटेक्शन कैमरा लगाया जाएगा। इसमें पुलिस लाइट भी लगेगी। उपकरण रखने के लिए मोटरसाइकिल के पिछले हिस्से में एक बॉक्स लगाया जाएगा। मोटरसाइकिल की सीट के बाईं ओर एक और बॉक्स लगाया जाएगा, जिसमें प्रिंटर और अन्य उपकरण रखे जाएंगे। निदेशक यातायात मुख्तार मोहसिन ने बताया कि शुरुआत में आठ इंटरसेप्टर तैयार किए जा रहे हैं।

बताया जा रहा है कि उत्तराखंड में सड़क हादसों के आंकड़े देखें तो अब सड़क हादसों में कमी आएगी। पिछले साल राज्य में 1405 सड़क हादसे हुए थे. इनमें से 820 लोगों की मौत हो गई। इस साल के पहले चार महीनों में अप्रैल तक 517 सड़क हादसे हुए जिनमें 318 लोगों की जान चली गई। राज्य में सड़क हादसों के बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकार और सरकार ने पुलिस और परिवहन विभागों को सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के अनुपालन की उचित व्यवस्था करने के निर्देश दिए थे।

पुलिस ने राज्य स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति के सामने दोपहिया वाहन इंटरसेप्टर बनाने का प्रस्ताव रखा था। कुछ समय पूर्व मुख्य सचिव डॉ. एसएस संधू की अध्यक्षता में हुई बैठक में पुलिस को उपकरण व वाहन उपलब्ध कराने के लिए सड़क सुरक्षा कोष से 7.5 करोड़ रुपये देने का निर्णय लिया गया. इस राशि में दुपहिया इंटरसेप्टर की लागत भी शामिल है।

 

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