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पहाड़ के लड़के की जीत पर झूम उठा देश, लक्ष्य सेन ने जीता कामनवेल्थ में गोल्ड

भारत को 73 साल बाद थॉमस कप दिलाने वाली भारतीय बैडमिंटन टीम के युवा सदस्य लक्ष्य सेन ने आज एक बार फिर कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को गोल्ड दिलाते हुए इस खिलाड़ी को अपना ‘लक्ष्य’ याद दिलाया। लक्ष्य सेन ने पुरुष एकल फाइनल में मलेशिया आंग जे योंग को हराकर स्वर्ण पदक जीता। राष्ट्रमंडल खेलों में यह उनका पहला पदक है।

आज वह एक सफल खिलाड़ी है जिसने संघर्ष और कड़ी मेहनत के साथ अपना रास्ता निकाला और इस जीत के पीछे अपने पिता और कोच डीके सेन की मदद से एक बड़ा हाथ है। लक्ष्य के पिता डीके सेन बैडमिंटन के जाने-माने कोच हैं और वर्तमान में प्रकाश पादुकोण अकादमी से जुड़े हुए हैं। अपने पिता की देखरेख में होश में आते ही लक्ष्य ने बैडमिंटन खेलना शुरू कर दिया। उन्होंने चार साल की उम्र में स्टेडियम जाना शुरू कर दिया था। छह-सात साल की उम्र में लोग उनका खेल देखकर हैरान हो जाते थे। लक्ष्य की दसवीं तक शिक्षा अल्मोड़ा के बिरशिवा स्कूल में ही हुई।

अल्मोड़ा के लक्ष्य सेन ने राष्ट्रमंडल खेलों में बैडमिंटन पुरुष एकल के फाइनल में मलेशिया के आंग जे योंग को हराया, मैच देखने वाले लोग, टीवी और मोबाइल फोन की स्क्रीन पर टकटकी लगाए, जैसे ही खेल समाप्त हुआ, हर कोई खुशी से झूम उठा। लक्ष्य सेन के गोल्ड मेडल जीतने से गांव, शहर से लेकर देश और राज्य में खुशी की लहर है।

भारत के लक्ष्य सेन ने राष्ट्रमंडल खेलों (CWG 2022) में पुरुष एकल का स्वर्ण पदक जीता है। फाइनल में लक्ष्य ने पहला गेम हारने के बाद मलेशिया के त्जे योंग को 19-21, 21-9, 21-16 से हराया। कॉमनवेल्थ गेम्स में पहली बार हिस्सा ले रहे 21 साल के लक्ष्य सेन ने भारत को 20वां गोल्ड दिलाया। इससे पहले पीवी सिंधु ने महिला एकल में भी स्वर्ण पदक जीता था। भारत के किदांबी श्रीकांत ने पुरुष वर्ग में कांस्य पदक हासिल किया।

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