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शुरू होने से पहले ही दिक्कते दे रहा कर्णप्रयाग रेल प्रोजेक्ट, श्रीनगर में लोगो के घर में पड़ी दरारें

उत्तराखंड में चारधाम रेल परियोजना का काम बहुत तेज गति से चल रहा है. योजना का मकसद चारधाम यात्रा को सुगम बनाना है, लेकिन जगह-जगह इस परियोजना के विरोध की खबरें आ रही हैं। इस बार मामला श्रीनगर गढ़वाल का है। जहां श्रीकोट गंगानाली में गैस गोदाम के पास रेल सुरंग निर्माण कार्य को आक्रोशित जनता ने रोक दिया।

लोगों का कहना है कि रेल सुरंग के निर्माण के लिए क्षेत्र में हो रहे ब्लास्ट से तोलुन के आवासीय भवनों को नुकसान हो रहा है। डरे हुए लोग रात भर सो नहीं पा रहे हैं, लेकिन आरवीएनएल प्रभावितों की समस्या पर ध्यान नहीं दे रहा है। सदस्य विभोर बहुगुणा और व्यापार परिषद अध्यक्ष नरेश नौटियाल सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने मौके पर ऋत्विक कंपनी के अधिकारियों के साथ ही आरवीएनएल के प्रबंधक विनोद बिष्ट से बातचीत की ।

आरवीएनएल के अधिकारियों ने लोगों को आश्वासन दिया कि अगले बुधवार तक वे अपनी रिपोर्ट पेश करेंगे और इस संबंध में लिखित में सूचित किया जाएगा। इस अवसर पर विभोर बहुगुणा ने कहा कि यदि आरवीएनएल चाहता है कि प्रभावित परिवार चार-पांच माह के लिए अपना मकान खाली कर दें तो इस अवधि के लिए प्रतिमाह उचित किराया भी दिया जाए। ताकि प्रभावित परिवार कहीं और शांति से रह सकें। वहीं प्रभावितों का कहना है कि अगर इस दौरान किसी भी तरह का नुकसान होता है तो इसके लिए पूरी तरह से आरवीएनएल जिम्मेदार होगा।

आपको बता दें कि ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के तहत 16 पुल, 17 सुरंग और 12 रेलवे स्टेशन बनाने का प्रस्ताव है। 125 किलोमीटर लंबी रेल परियोजना को वर्ष 2024 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, प्रभावित ग्रामीण विभिन्न स्थानों पर परियोजना को लेकर विरोध भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि प्रोजेक्ट के लिए हुए ब्लास्ट से उनके घर ढहने की कगार पर हैं, लेकिन निर्माण एजेंसी इस ओर ध्यान नहीं दे रही है।

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