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उत्तराखंड में अफ्रीकन स्वाइन फीवर का हमला, एक साथ 200 सूअर मरे

कोरोना के बाद कोटद्वार क्षेत्र के लोग इन दिनों बड़े खतरे का सामना कर रहे हैं। यहां सुअरों की मौत के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, इसके पीछे का कारण अफ्रीकन स्वाइन फीवर है। अफ्रीकन स्वाइन फीवर के कारण यहां सूअर बीमार होकर मर रहे हैं।

बीमारी के खतरे को देखते हुए नगर निगम ने पशुपालन विभाग के साथ मिलकर सुअर मालिकों से कई बार अपने सूअरों को बाड़े में रखने की अपील की है, लेकिन सुअर किसान नहीं सुन रहे है।

पशुपालन विभाग ने सुअरों की मौत के पीछे अफ्रीकी स्वाइन फीवर रोग को कारण बताया है। पशुपालन विभाग की ओर से जारी नोटिस के बाद हरकत में आई नगर निगम ने सुअर मालिकों को मरे हुए सूअरों को गड्ढे में दबाने के साथ ही शेड में रखने के निर्देश जारी किए हैं।

साथ ही सफाई हवलदारों को नोटिस, खुले में सुअरों को छोड़ने वाले मालिकों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश भी दिए हैं। पशु चिकित्सक डॉ. बीएम गुप्ता ने बताया कि जब तक सूअर खुले में घूमते रहेंगे, तब तक बीमारी पर नियंत्रण संभव नहीं है. उन्होंने पशुपालकों से अपने सूअरों को शेड में रखने की अपील की है. आपको बता दें कि शहर के कौड़िया क्षेत्र के अमपदव में पशुपालकों ने सूअर पाल रखे हैं।

पिछले कुछ दिनों से लगातार पशुपालकों के सूअर मर रहे हैं। नगर निगम ने सुअर किसानों को सख्त कार्रवाई की चेतावनी देते हुए कहा है कि सूअरों को शेड में रखा जाए, लेकिन इस चेतावनी का भी सुअर किसानों पर कोई असर होता नहीं दिख रहा है, स्थिति यह है कि स्वाइन फीवर फैलने के बावजूद कई सुअर किसानों ने अपने सूअरों को सड़कों पर खुला छोड़ दिया है, जो एक बड़ा खतरा है।

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