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देहरादून की आर्टिफीसियल झील बनी लोगो की जान की मुसीबत, सुबुवाला गाँव के लोगो को अनहोनी का खतरा

डोईवाला प्रखंड के साईबुवाला गांव के लोग इन दिनों चैन की नींद नहीं सो पा रहे हैं. दरअसल इस गांव पर तबाही का खतरा मंडरा रहा है. इसका कारण सूर्यधार बांध से करीब तीन किमी आगे बनी कृत्रिम झील है, जो निकट भविष्य में कभी भी बड़ी तबाही मचा सकती है। पीएमजीएसवाई खंड नरेंद्रनगर के तहत इथराना-कलबाना-कुखुई-मोटर सड़क के निर्माण कार्य से मलबा फेंके जाने से कृत्रिम झील का निर्माण हुआ है|

इस झील ने नदी के प्रवाह को आंशिक रूप से रोक दिया है। अगर तेज बारिश हुई तो जखान नदी पर बने निर्माणाधीन पुल तक मलबा पहुंचने का खतरा है। जिससे जाखन नदी का प्रवाह भी अवरुद्ध हो सकता है। यदि ऐसा होता है तो सैबुवाला, खड़क, कैरवां, मलकोट, सूर्यधर बांध, रानीपोखरी अनुदान आदि गांवों और सड़कों को नुकसान होने की संभावना है। सोमवार को सिंचाई खंड देहरादून, पीएमजीएसवाई खंड, देहरादून और नरेंद्र नगर के साथ राजस्व विभाग के अधिकारियों ने दौरा किया. मौके पर नदी की स्थिति का जायजा लिया और झील का निरीक्षण किया।

अधिकारियों के मुताबिक यह झील करीब 100 मीटर लंबी और 3.5 मीटर गहरी है. झील अनुमानित 7875 घन मीटर पानी की जल क्षमता धारण कर सकती है। अब तालाब को चौड़ा करने और जमा पानी को निकालने का विचार चल रहा है। ऐसी ही एक खबर विकासनगर से आ रही है। इधर व्यासी जलविद्युत परियोजना के बांध के मुहाने के पास पानी रोकने के लिए बनी सुरक्षा दीवार (वायरक्रीट) जलस्तर बढ़ने से ढह गई।

ग्रामीणों का आरोप है कि करोड़ों की लागत से बने प्रोजेक्ट के शुरू होने पर निर्माण के ढहने से गुणवत्ता संदेह के घेरे में आ रही है. परियोजना के शुरू होने के चार महीने के भीतर, गेट के पास झील के किनारे की सुरक्षा दीवार ढह गई। इससे दिल्ली-यमुनोत्री हाईवे के ढहने का खतरा बना हुआ है। हालांकि अधिकारियों का दावा है कि यह एक सामान्य प्रक्रिया है। सुरक्षा दीवार की लगातार निगरानी की जा रही है।

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