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उत्तराखंड की महिलाएं अब इस वजह से बनेंगी लखपति दीदी, यह योजना उनके भविष्य को उज्ज्वल करेगी

राज्य सरकार के लिए यह मुख्य और महत्वपूर्ण बात है कि वह हर उस व्यक्ति को रोजगार साबित करे जो इसकी तलाश में है और इसके लिए सक्षम है। इसमें उत्तराखंड के हर गांव को स्वरोजगार प्रदान करें। ऐसे में स्वयं सहायता समूह खुद को सर्वश्रेष्ठ साबित कर रहे हैं। वे ग्रामीण महिलाओं को बनाने में बहुत अच्छा काम कर रहे हैं| रोजगार उपलब्ध कराकर उन्हें रोजगार प्रदान किया जा सकता है, जिससे प्रवासन की गंभीर समस्या का समाधान हो सकता है। अब केंद्र सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत तीन लाख महिला लखपति बनाने की योजना पर काम शुरू हो गया है|

इस योजना ‘लखपति दीदी’ के तहत उन महिलाओं के लिए जो स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से संबंधित हैं, उन्हें कौशल विकास के साथ सूक्ष्म उद्यमों के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। साथ ही इस वित्तीय वर्ष में प्रदेश में 20 हजार नये स्वयं सहायता समूह भी बनाये जायेंगे, जिससे अधिक से अधिक महिलाओं को योजना का लाभ मिल सके. बता दें कि प्रदेश के 95 प्रखंडों में 39,116 स्वयं सहायता समूहों में 3 लाख 5 हजार महिलाओं को संगठित कर इस समय 4 हजार 310 ग्राम संगठन और 259 क्लस्टर स्तर के संगठनों का गठन किया गया है|

अब तक स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं अचार, पापड़, हस्तशिल्प, सब्जी, रेशम, फल आदि बनाने तक ही सीमित थीं। लेकिन आने वाले दिनों में इन महिलाओं को बिजली मिस्त्री, प्लंबर, राजमिस्त्री, खाद बनाने, जैविक खेती, एलईडी बल्ब बनाने जैसे कामों में कुशल बनाया जाएगा. स्वयं सहायता समूहों (स्वयं सहायता समूहों) द्वारा तैयार उत्पादों के विपणन के लिए एनआरएलएम कार्यक्रम के माध्यम से इन्हें एक छत के नीचे लाया जाएगा ताकि विभिन्न समूहों को एक श्रृंखला में विभाजित किया जा सके।

पिछले वित्तीय वर्ष में 11 हजार समूहों को कर्ज दिया गया। इस बार लक्ष्य 18 हजार रखा गया है। स्वयं सहायता समूहों से संबंधित महिलाओं के उत्पादों के लिए उचित बाजार प्रदान करने के लिए Amazon, Flipkart, Mantara, PayTM Mall और Government e-Market Places (GeM) जैसी ई-कॉमर्स वेबसाइटों को भी जोड़ा जा रहा है। इस पहल का स्वागत करते हुए अपर सचिव ग्रामीण विकास आनंद स्वरूप ने कहा कि लखपति दीदी योजना के तहत एप के माध्यम से प्रखंड एवं जिला स्तर पर प्रशिक्षण कोड-ऑर्डिनेटर का कार्य शुरू कर दिया गया है. सर्वे से पता चलेगा कि एसएचजी से जुड़ी महिलाएं फिलहाल क्या काम कर रही हैं और क्या बेहतर कर सकती हैं।

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