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उत्तराखंड के इस गांवों में लगता है कुम्भ की तरह हर 12 साल में मेला, जानिए क्या है खास इस मेले में

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के धारचूला के सीपू गांव में ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन होने जा रहा है. सीपू गाँव को भारत का अंतिम गाँव माना जाता है। यहां हर 12 साल बाद इस गांव में महादेव की विशेष पूजा की जाएगी। इस आयोजन की अहमियत का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि इस आयोजन में दारमा घाटी के 14 गांवों के सभी लोग शामिल होंगे. साथ ही दारमा घाटी के वे मूल निवासी जो किन्हीं कारणों से दूसरे शहरों में बस गए हैं, वे भी गांव लौटेंगे।

दारमा घाटी के 14 गांवों के लोग देश के कोने-कोने से अपने गांव पहुंचने लगे हैं, जहां वे बसे थे. इस सबसे खास आयोजन में महादेव की पूजा करने के लिए। चीन की सीमा से लगे सीपू गांव में सिपाल जाति के लोग रहते हैं। पारंपरिक तरीके से हो रही पूजा को लेकर गांव की युवा पीढ़ी में खासा उत्साह है। इस पूजा में गांव की नई पीढ़ी पहली बार शामिल होगी।

चीन सीमा से सटे भारतीय सीमा क्षेत्र को भगवान शिव की भूमि माना जाता है। हिंदुओं की सबसे बड़ी धार्मिक यात्रा कैलाश मानसरोवर की शुरुआत इसी धरती से हुई थी। सदियों से यात्री इसी मार्ग से शिव के धाम कैलाश पहुंच रहे हैं। इस क्षेत्र में तीन घाटियाँ हैं जो धारचूला के अंतर्गत आती हैं। इनमें व्यास घाटी, चौदंस घाटी और दारमा घाटी शामिल हैं।

बारह वर्ष के अंतराल के बाद तीनों घाटियों में भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है। इस वर्ष यह पूजा दारमा घाटी के सीपू गांव में होनी है। पिछले महीने हिमनदों के खिसकने के कारण सीपू गांव का पैदल मार्ग क्षतिग्रस्त हो गया था, और अन्य संपर्क सड़कें बेहद खतरनाक बनी हुई हैं। गांव के लोगों ने बताया कि कई जगह सड़क की हालत खराब है. जिससे बुजुर्गों और महिलाओं का गांव तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने एसडीएम से सड़क की तत्काल मरम्मत कराने की मांग की है|

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