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आज भी बिछड़े हुए है केदारनाथ आपदा में बिछड़े लोग, तमिलनाडु का एक यात्री अभी भी है घर से दूर

इस दुराचार के समय में भी सेवा और मानवता की ऐसी कहानियाँ हैं जो दिखाती हैं कि लोगों में मानवता बची है, और वे बेहतरी की आशा देते हैं। ऐसी ही हलचल उत्तराखंड में सामने आ रही है जिससे पता चलता है कि हालात कितने भी बुरे क्यों न हों, लेकिन अगर किसी की मदद करने की तमन्ना है तो रास्ते भी हैं|

तहबागेश्वर जिले में तमिलनाडु का एक युवक गरुड़ घाटी क्षेत्र के जंगलों में घूमता मिला। आमतौर पर लोग अनजान लोगों की मदद करने से पहले उन पर शक करते हैं, लेकिन गरुड़ के ग्रामीणों ने सहानुभूति दिखाई और इस अनजान युवक की मदद की, उसे खाना खिलाओ, उसे पहनने के लिए कपड़े दिए। युवक हिंदी नहीं जानता और अपना नाम और पता नहीं बता पा रहा था।

काफी मशक्कत के बाद सभी को पता चला कि युवक सिर्फ तमिल जानता है। तभी इलाके के युवक किसी तरह उस युवक को दिल्ली के तमिलनाडु भवन ले गए| जहां से उसे मदुरै ले जाने के प्रयास किए जा रहे हैं। गरुड़ के ग्रामीणों का कहना है कि यह मानसिक रूप से विक्षिप्त व्यक्ति 2013 के केदारनाथ आपदा का शिकार हो सकता है। युवा पत्रकार अखिल जोशी की पहल पर, ग्रामीणों ने न केवल इस व्यक्ति की मदद की, बल्कि उसे भेजने की व्यवस्था भी की। तमिलनाडु को। बताया जा रहा है कि दो सरकारी अधिकारी दिल्ली पहुंच चुके हैं, जो युवाओं को विमान से चेन्नई ले जाएंगे।

एसएचओ कैलाश बिष्ट ने बताया कि यह शख्स तमिलनाडु से 2700 किमी दूर यहां कैसे पहुंचा? वह हिंदी और अंग्रेजी बोलने में असमर्थ था। ग्रामीणों के सहयोग से ही युवाओं को तमिलनाडु भेजना संभव हो पाया है। अब गांव वाले खुश हैं कि आवारा आदमी को उसका परिवार मिल सकता है| गरुड़ के ग्रामीणों ने एक अनजान व्यक्ति के लिए जो किया वह वाकई काबिले तारीफ है।

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