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उत्तराखंड में गुलदार कर रहे अपना विस्तार, शेर से भी ज्यादा हो रहे जानलेवा

पहाड़ की जिंदगी आसान नहीं होती, पहाड़ की जिंदगी में हर कदम पर खतरे होते हैं। चाहे प्राकृतिक हो या जंगली जानवरों से, लोगों का जीवन दांव पर लगा है। हाल ही में क्षेत्र में जंगली जानवरों और लोगों के बीच संघर्ष के मामले काफी बढ़ रहे हैं। जो जानवर जंगल और लोगों के जीवन को प्रभावित कर रहे हैं, वे गुलदार हैं, वे आबादी वाले क्षेत्रों में प्रवेश कर रहे हैं और निर्दोष लोगों को घर के आंगन से दूर ले जा रहे हैं। पहाड़ी इलाकों में गुलदार बाघ और हाथियों से भी ज्यादा खतरनाक साबित हो रहे हैं।

पिछले साल जंगली जानवरों की वजह से 59 लोगों की जान चली गई थी, जबकि 225 लोग घायल हुए थे। इनमें सबसे खतरनाक गुलदार साबित हो रहा है। इस दौरान नरभक्षी गुलदार 22 लोगों को निवाला बना चुका है। वहीं कई लोग इनके चंगुल से छूटने में कामयाब हो जाते हैं|इस साल गुलदार हमले में अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है। गुलदार के अलावा बाघ, हाथी, भालू और सुअर के हमले की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। घनसाली क्षेत्र में रविवार की देर रात गुलदार सात साल के बच्चे को आंगन से उठा ले गया. बच्ची का क्षत-विक्षत शव देर रात घर से महज 50 मीटर की दूरी पर झाड़ियों में मिला। घटना के वक्त बच्चा शादी समारोह से लौट रहा था।

दूसरी ओर द्वाराहाट क्षेत्र में भी गुलदार हमले में 27 वर्षीय एक युवक के घायल होने की खबर है. इस तरह की घटनाओं पर विभागीय अधिकारी भी नियंत्रण नहीं कर पा रहे हैं। हाल ही में वन विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान सीएम पुष्कर सिंह धामी ने वन अधिकारियों को फटकार लगाई थी. उन्होंने गुलदार के बच्चों को निवाला बनाने के लिए डीएफओ और रेंजर को जिम्मेदार ठहराने के निर्देश दिए थे, हालांकि विभाग की सुस्ती थमने का नाम नहीं ले रही है|

अन्य कारण जंगल की आग बताया जाता है, इस तरह की घटनाएं क्षेत्र में बहुत बढ़ गई हैं और इसके कारण आबादी वाले क्षेत्रों में जंगली जानवरों के आने का खतरा बढ़ रहा है। गुलदार के हमले से बचने के लिए कहा जाता है कि लोगों को सुरक्षात्मक भी होना चाहिए। जंगलों को आग से बचाएं। खेतों में काम करने के लिए समूहों में जाएं। रात के समय बच्चों को घर से बाहर अकेले शौचालय में न भेजें। बच्चों को स्कूल जाते समय माता-पिता के साथ भेजें। घर के आसपास झाड़ियां न उगने दें। साथ ही शाम के समय आंगन में बत्ती जलाकर रखें।

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