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उत्तराखंड में लगतार आ रहा है भुकम्प नहीं है अच्छे संकेत, वैज्ञानिक ने दी बड़े भुकम्प की चेतवानी

हाल के दिनों में उत्तराखंड राज्य के हिमालयी बेल्ट में लगातार भूकंप के झटके महसूस किए जा रहे हैं। अभी कुछ दिन पहले उत्तरकाशी में ये झटके 3.9 के पैमाने पर महसूस किए गए थे। इस बीच वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के वैज्ञानिकों ने भूकंप को लेकर बड़ी चेतावनी दी है। वैज्ञानिकों का कहना है कि पृथ्वी के नीचे लगातार हलचल हो रही है, यह किसी बड़े जोखिम का संकेत है। हमें भूकंप के झटकों के लिए तैयार रहना होगा। वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के वैज्ञानिक डॉ. सुशील कुमार का कहना है कि उत्तराखंड भारतीय प्लेट और यूरेशियन प्लेट पर स्थित है, जिसकी लंबाई लगभग 2400 किमी है।

एक अध्ययन में यह पाया गया है कि भारतीय प्लेट हर साल यूरेशियन प्लेट से 40 से 50 मिलीमीटर नीचे खिसक रही है। इससे धरती कांप रही है। डॉ. सुशील ने बताया कि वाडिया भूकंप और आपदाओं से निपटने के लिए पूर्व चेतावनी प्रणाली पर काम कर रहे हैं। साथ ही इस दृष्टिकोण के साथ उत्तराखंड में 17 ब्रॉडबैंड सिस्मोग्राफ लगाए गए हैं। 5 जीपीएस सिस्टम लगाए गए हैं। यह पहले से ही देखा गया है कि उत्तराखंड में हर 50 साल में एक बड़ा भूकंप आता है जो 7 से 9 की आवृत्ति तक पहुंचता है।

डॉ. सुशील कुमार ने भूकंप से बचने के अपने सुझाव दिए हैं। उनका कहना है कि यह कहना मुश्किल है कि भविष्य में कितनी बड़ी आवृत्ति का भूकंप आएगा, लेकिन इसके लिए नुकसान को कम करने के लिए अभी से सावधानी बरतनी चाहिए। सरकार को निर्माण कार्य योजनाबद्ध तरीके से करना होगा। सड़कों, मकानों और अन्य बड़ी परियोजनाओं का निर्माण करते समय भूकंप को ध्यान में रखा जाना चाहिए। पहाड़ों और मैदानी इलाकों के लोगों को अपने घरों को भूकंपरोधी बनाने पर जोर देना चाहिए।

उन्होंने जापान का उदाहरण दिया और कहा कि हमें जापान से भूकंप प्रतिरोधी घर, सड़कें और बड़े भवन बनाना सीखना चाहिए। क्योंकि 1991 की तरह अगर 6 रिक्टर स्केल का भूकंप आया तो हमारी सड़कें जाम हो सकती हैं. इससे बचाव कार्य प्रभावित हो सकता है। राज्य में जनवरी से अब तक करीब 14 बार भूकंप के झटके महसूस किए गए। जिसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 2 से 4.5 के बीच रही। उत्तराखंड भूकंप के इन झटकों से कोई नुकसान नहीं हुआ, लेकिन ये निश्चित रूप से आसन्न खतरे का संकेत हैं। हमें सतर्क रहना होगा।

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