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पुरानी टिहरी की ही तरह विकास की भेट चढ़ जायेगा उत्तराखंड का एक और गाँव, लोहारी को खाली कराने के लिए इक्कठा हुए आला अधिकारी

यमुना पर 120 मेगावाट की व्यासी परियोजना के लिए बनाई गई झील में जलस्तर बढ़ने की भीख मांग रही है। जलमग्न क्षेत्र के लोहारी गांव को पूरी तरह खाली करने का अल्टीमेटम दिया गया, जिसके चलते ग्रामीणों ने अपने पुश्तैनी घर से सामान निकाल लिया. वास्तविक स्थिति जानने लोहारी गांव पहुंचे प्रशासनिक अधिकारी. परियोजना झील में जलस्तर बढ़ने से लोहारी गांव जल्द ही जलमग्न हो जाएगा। शुक्रवार तक पानी गांव के पास पहुंच गया।

बताया जा रहा है कि तालाब के स्तर को बनाए रखने के लिए परियोजना से निर्धारित क्षमता का बिजली उत्पादन शुरू होगा। अभी तक जल विद्युत निगम को समस्या का सामना करना पड़ रहा था कि बांध प्रभावित जलमग्न क्षेत्र के लोहारी गांव को खाली नहीं किया जा सका है. जिला प्रशासन ने परियोजना से प्रभावित परिवारों की पहचान कर मुआवजा देने की प्रक्रिया पूरी की, जिसके बाद ग्रामीणों को गांव खाली करने का अल्टीमेटम दिया गया|

अपर जिलाधिकारी प्रशासन एसके बरनवाल जैसे प्रधानों ने बताया कि व्यासी परियोजना के कारण जलमग्न क्षेत्र में आने वाले लोहरी गांव के कुल 66 बांध प्रभावित परिवारों को सरकार की ओर से कुल 15 करोड़ 44 लाख रुपये का मुआवजा स्वीकृत किया गया है. इसमें प्रभावित परिवारों को विस्थापन एवं पुनर्वास नीति के तहत प्रारंभिक चरण में अस्सी प्रतिशत मुआवजा दिया गया है। 48 घंटे का घर खाली करने का समय भी खत्म हो गया है।

प्रत्येक अधिकारी यह सुनिश्चित करने के लिए मौके पर पहुंचता है कि काम बिना किसी अव्यवस्था के सुरक्षित रूप से हो। एसडीएम विकासनगर विनोद कुमार, एसडीएम कलसी सौरभ असवाल, लखवार व्यासी परियोजना के कार्यकारी निदेशक राजीव अग्रवाल, सीओ वीडी उनियाल, दीपक कुमार, कोतवाल रविद्र शाह, एसएचओ कलसी अशोक राठौर, एसओ चकराता सत्येंद्र भाटी आदि एडीएम के साथ लोहारी का जायजा लेने पहुंचे|

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