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रानीखेत का किसान उगा रहा है काम मिटटी और पानी में सब्जी, करोड़ में उठा रहा है अपनी लागत

कोरोना लॉकडाउन के बाद उत्तराखंड में खेती से लोगों का मोहभंग होता जा रहा है। अब जमीन बंजर होती जा रही है, किसान खेती करते हैं लेकिन जानवर फसलों को नष्ट कर देते हैं। ऐसे समय में हाइड्रोपोनिक खेती की तकनीक किसानों के लिए काफी मददगार साबित हो सकती है। अल्मोड़ा के रानीखेत रियासत के एक तह किसान दिग्विजय सिंह बोरा और उनके साथी खेती में ग्रेटा व्यवसाय कर रहे हैं, वे इस तकनीक का उपयोग करके सब्जियों की खेती करके हर साल एक करोड़ रुपये से अधिक कमा रहे हैं। दिग्विजय सिंह इंकदेवी इलाके में रहते हैं।

वे इस हाइड्रोपोनिक तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने लगभग 8 अन्य सलाद सब्जियां उगाना शुरू कर दिया। अब यहां की यह पौष्टिक और साफ सब्जियां दिल्ली-मुंबई पहुंच रही हैं। दिग्विजय सिंह कृषि में प्रयोग करते रहते हैं। उन्होंने रेड ओटर में काम करने वाले अपने सहयोगियों अनुभव दास और विकास भसीन के साथ हाइड्रोपोनिक तकनीक से सब्जियां उगाने की योजना बनाई। यहां उन्होंने सलाद में इस्तेमाल होने वाली सब्जियां उगाने के लिए एक यूनिट लगाकर काम शुरू किया।

दिल्ली, मुंबई, लखनऊ जैसे सभी शहरों और होटलों में इन सब्जियों की जबरदस्त मांग है। उनके बाद तीन सहयोगियों ने दिल्ली में एक मार्केटिंग कंपनी के साथ सब्जी बेचने का समझौता भी किया। दिग्विजय सिंह बताते हैं कि हाइड्रोपोनिक तकनीक में पानी की खपत कम और बचत ज्यादा होती है। कम मात्रा में पानी का उपयोग किया जाता है और उत्पादन अधिक होता है। इस विधि से उगाए गए सब्जियों के पौधों में रोग नहीं लगते हैं। हाइड्रोपोनिक तकनीक से खेती करते समय पोषक तत्वों से भरपूर पानी के अलावा रेत या कंकड़ की एक परत बिछाई जाती है।

इसके बाद नाइट्रोजन, कैल्शियम और खनिजों की संतुलित मात्रा वाले पानी में जड़ें फैलने लगती हैं। 100 वर्ग फीट में करीब 200 पौधे लगाए जा सकते हैं। दिग्विजय और उनके सहयोगियों ने एक साल में 1 करोड़ रुपये का कारोबार किया है। यूनिट लगाने में 40 से 50 हजार का खर्च आता है। एक साल की मेहनत के बाद दिग्विजय सिंह बोरा को अच्छे नतीजे मिले हैं। अब वह क्षेत्र के ग्रामीणों को आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण देने की योजना बना रहे हैं, ताकि वे भी पारंपरिक खेती से हटकर अपनी अर्थव्यवस्था में सुधार कर सकें।

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