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पहाड़ की संस्कृति पर पड़ा पलायन का असर, 15 साल से अपने गाँव में अकेले त्यौहार मना रही है 56 साल की डिकरी देवी

उत्तराखंड में अभी कुछ दिन पहले फुलदेई का पर्व धूमधाम से मनाया गया। मार्च महीने में मनाया जाने वाला यह पर्व राज्य के हर गांव में बच्चों की टोली चौखट पर फूल बिखेरती नजर आई, लेकिन लोहाघाट के काकड़ गांव में फूलदेई के इस पावन अवसर पर सन्नाटा पसरा रहा| ऐसा इसलिए है क्योंकि पलायन के कारण पूरा गांव खाली हो गया है। काकड़ गांव बाराकोट प्रखंड के अंतर्गत आता है, जहां आबादी के नाम पर सिर्फ एक महिला डिकरी देवी रहती है| सोमवार को डिकरी देवी ने बंजर घरों से पास के कुछ घरों की दहलीज पर फूल और अक्षत चढ़ाए। कभी इन घरों में रहने वाले लोगों की सलामती की दुआ की।

डिकरी देवी ने बताया कि करीब डेढ़ दशक पहले गांव के लोग सुविधाओं के अभाव में पलायन कर गए थे और रोजगार की तलाश में कांकड़ के अलावा टोक बांस बगोला, किमटोला, बंटोला, खेतड़ी, चमोला में करीब 90 परिवार पलायन कर चुके हैं| इन गांवों में सड़क, स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। अपने परिवार को जीने का एक शाश्वत तरीका देने के लिए लोग गाँव छोड़कर मेट्रो शहरों में चले गए।

गौरतलब है कि उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले लोगों को पलायन की समस्या का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि यहां उचित स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के अवसर नहीं हैं।मुख्य सड़क से करीब सात किलोमीटर दूर काकड़ इलाके में रहने वाली 56 वर्षीय महिला डिकरी देवी ही बची हैं| डिकरी देवी गांव में अकेले रहकर हर त्योहार मनाती है। फुलदेई के मौके पर डिकरी देवी ने लोगों के सूने घरों की दीवारों को फूलों से सजाया|

डिकरी देवी का कहना है कि डेढ़ दशक पहले यहां काफी चहल-पहल हुआ करती थी और उनके गांव में हर त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है। लेकिन अब फुलदेई और हर मांगलिक त्योहार पर भी गांव में कोई नहीं होता, यहां के हर घर के दरवाजे एपेन और फूलों से सजाए जाते थे, लेकिन बुनियादी सुविधाओं के अभाव में लोग गांव छोड़कर चले जाते थे|

अब डिकरी देवी पूरे गांव में अकेली रह रही है। वह गांव में खेती करती है। डिकरी देवी अभी भी पलायन कर चुके परिवारों की वापसी का इंतजार कर रही है। उनका कहना है कि अगर सरकार ने यहां बुनियादी सुविधाएं विकसित करने पर ध्यान दिया होता तो परिवारों को गांव नहीं छोड़ना पड़ता| पलायन की समस्या पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।

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