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कम नहीं हुआ उत्तराखंड में गुलदार का आतंक, अब फारेस्ट डिपार्टमेंट करेगा जंगल से लकड़ी वालो की रक्षा

उत्तराखंड राज्य में हिंसक जंगली जानवरों और इंसानों के बीच संघर्ष के मामले बढ़ते जा रहे हैं। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व (सीटीआर) और कालागढ़ रेंज की सीमा पर स्थित कुम्पी गांव में स्थिति इतनी खराब हो गई है कि अब गांव को वन विभाग के एसओजी और बचाव दल को सौंप दिया गया है| कई बार बाघ जंगल में काम करते हुए लोगों को अपना शिकार बना चुका है। गश्ती दल की नजरों में न आने पर बाघ की चाल बदलने से फिर से मानव वन्यजीव संघर्ष की आशंका को देखते हुए ग्रामीणों को पूरी सुरक्षा मुहैया कराई जा रही है|

खासकर महिलाएं जो बंदूकों से लैस एसओजी कर्मियों की निगरानी में जंगल से चारा काट रही हैं| 1 मार्च को गांव की महिला गुड्डी देवी जंगल में घास काटने गई और बाघ ने उसे अपना शिकार बना लिया| बाघ ने तलाशी का खेल खेलना शुरू कर दिया है, जब उनका शिकार होना तय है। अब खबर है कि हिंसक बाघ ने कुम्पी गांव से भागकर पड़ोसी झारगांव में दहशत फैलाना शुरू कर दिया है|

उसने आबादी वाले इलाके में मवेशियों का शिकार किया और करीब 200 मीटर दूर सुनसान जगह पर घसीटा। वन विभाग की नजर में बाघ भी नहीं आ रहा है। लोगों की जान पर इस बड़े खतरे को देखते हुए विभागीय एसओजी के कर्मियों की देखरेख में कुम्पी गांव की महिलाओं को घास काटने के लिए भेजा जाता है, जो मवेशियों के लिए चारा काटने के लिए आबादी से दूर जा रही हैं|

दोपहर में चारा लेकर घर पहुंचने तक एसओजी टीम के जवान उनके साथ तैयार होने लगे हैं| डीएफओ के साथ उपमंडल वन अधिकारी गणेश त्रिपाठी, वन अधिकारी जौरासी रेंज विक्रम सिंह कैडा और सेवाराम (मोहन), एसओजी प्रभारी गंगाशरण, उप रेंजर हेम आर्य आदि दिनभर गश्त में लगे रहते हैं|

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