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उत्तराखंड के वन विभाग को सत रहा “पुष्पा” का दर, इस क्षेत्र के लाल चंदन पर मण्डराया खतरा

2022 में दक्षिण की सबसे प्रसिद्ध फिल्म ‘पुष्पा: द राइज’ चारों तरफ धूम मचा रही है। लोग इस पर तरह-तरह के ट्रेंड को बांधकर फॉलो कर रहे हैं। इस फिल्म के गानों से लेकर डायलॉग्स तक लोगों द्वारा काफी कॉपी किया जा रहा है| फिल्म में आंध्र प्रदेश की पहाड़ियों में लाल चंदन की तस्करी की कहानी को दिखाया गया है।

यह फिल्म का कथानक है, लेकिन लाल चंदन का पेड़ न केवल दक्षिण भारत में बल्कि उत्तराखंड राज्य में ऋषिकेश में भी है। 15 साल पुराने इस पेड़ की कीमत लाखों रुपए आंकी गई है। जिसकी सुरक्षा अब वन विभाग के लिए चुनौती है। दरअसल, वन विभाग को डर है कि कहीं कोई ‘पुष्पा’ इस पेड़ को न देख कर काट दे| हैरानी की बात यह है कि यह पेड़ सालों से शहर की आईडीपीएल कॉलोनी में था, लेकिन इसकी जानकारी वन विभाग को हाल ही में मिली है। अब इसकी सुरक्षा वन विभाग कर रहा है|

सूत्रों के मुताबिक लाल चंदन के पेड़ की कीमत 60 से 90 हजार रुपये प्रति किलो है। चीन समेत कई देशों में लाल चंदन की काफी मांग है। जैसा कि यह दवा के रूप में प्रयोग किया जाता है और बहुत दुर्लभ है। आमतौर पर लाल चंदन के पेड़ आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु की सीमा पर पाए जाते हैं, लेकिन उत्तराखंड की जलवायु और मिट्टी भी लाल चंदन के लिए अनुकूल है।

वन विभाग के अनुसार उन्होंने अधिकृत किया है कि एक व्यक्ति पिछले 15 वर्षों से ऋषिकेश की आईडीपीएल कॉलोनी में खड़े लाल चंदन के पेड़ की रक्षा कर रहा है, लेकिन तह फिल्म के बाद लोगों को इस प्रकार की लकड़ी से होने वाले लाभ के बारे में पता है, और अब पेड़ पर तस्करों की नजर नहीं पड़ी है। अब पेड़ों को तस्करों से बचाने के लिए मौके पर ही मंदिर बनाने की बात हो रही है| वन अधिकारी ने वनकर्मियों को ऋषिकेश के लाल चंदन की निगरानी करने के निर्देश दिए हैं|

 

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