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आज भी जिन्दा है अश्वथामा, जीवित होने के मिले सबूत जिसे देख कर कोई भी हैरान हो जायेगा

आज की इस पोस्ट में हम आपको बतायेगे की आज भी अश्वथामा जिन्दा है जिको लोगो द्वारा देखा गया है और उसके सबुत भी मिले है। जैसा की आप जानते ही होंगे की महाभारत में अश्वथामा एक योद्धा थे जोकि अकेले अपने दम पर पूरा युद्ध लड़ने की क्षमता रखते थे महाभारत की युद्ध की समाप्ति के बाद कौरव और पांडवों के गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वथामा ने चल से पांडवों के पुत्रों का वध किया था उनके इस पाप की सजा वे आज तक भुगत रहे है। अश्वथामा ने अपने पिता गुरु द्रोण की मौत का बदला लेने के लिए बहुत ही गलत काम किया था कहा जाता है महाभारत का युद्ध समाप्त होने के बाद अश्वथामा ने अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ में पल रहे बालक परीक्षित पर ब्रम्हास्त्र का प्रयोग कर उसकी हत्या कर दी थी तब भगवन श्री कृष्ण अधिक क्रोधित हुए थे तब भगवन कृष्ण ने अश्वथामा ये श्राप दिया था की तुमने जन्म तो देखा है लेकिन मृत्यु को नहीं देख पाओगे और अश्वथामा के सर से चिंता मंडी और भी चीन लिया था और कहा था समय के अंत तक तुम ऐसे रहोगे।
अश्वथामा को मिले एक श्राप के करन माना जाता है की आज भी अश्वथामा जीवित है और दर दर भटक रहे है और तो और लोगो ने अश्वथामा को कई जगह देखने का दवा भी किया है। सबसे पहले आता है असीरगढ़ का किला जिमे माना जाता है है की असीरगढ़ के किले के शिव मंदिर में अश्वथामा रोज सबसे पहले पूजा लड़ने आता है शिवलिंग पर रोज़ फूल और गुलाल चढ़ा मिलने अपने आप में एक रहस्य है यहाँ के स्थानीय लोगो का कहना है की अश्वथामा आज भी इस किले में भगवन शिव की पूजा करने आते है।

द्रोणनगरी में स्तिथ दोणाचार्य के तपस्थली मानी जाती यहीं गरीबी के कारण दूध नहीं मिलने पर अश्वथामा ने भगवन से दूध प्राप्ति के लिए छह माह तक कठोर तपस्या की थी। अश्वथामा की तपस्या से खुश होकर भगवन ने अश्वथामा को दूध प्राप्ति का शिरवाद दिया। फिर आता है पायलट बाबा व्यक्तिगत रूप से मिले है अश्वथामा से हैरानी वाली बात तो ये है की जाने माने बाबा पायलेट कभी जेट प्लेन पायलेट हुआ करते थे उन्होंने भी अश्वथामा को देखा है उन्होंने कुछ उन्होंने बताया की एक दिन जब हम सुलपानेश्वर महादेव मंदिर के परिसर में आराम कर रहे थे, तो मेरी आँख एक असाधारण प्राणी की आखों की तरफ आकर्षित हुई वे युवा जैसे दीखते थे और उनकी आँखों में आग जैसी चमक थी और उनका माथा पीले कपडे से बंधा हुआ था फिर मेने जब उसका पीछा किया तो वे आदमी पीछा ना करने का अनुरोध किया तो मैंने कहा तुम कौन हो मैं तम्हारा परिचय चाहता हु चाहे हम पूर्ण हो या अपूर्ण हम तुम्हारे मार्गदर्शन की प्रतीक्षा कर रहे है मैं जानना चाहता हु की आप कौन है तो उन्होंने बताया की मैं गुरु आचार्य का पुत्र अश्वथामा हूँ तब उस समय उन दोनों की बात चित हुई फिर एक और सबुत सामने आता है की अश्वथामा की मुलाकात पृथ्वीराज से भी हुई थी।

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